PRAHAR DUSTAK/चन्दौली। नरायनपुर पम्प कैनाल के जोगवा से सिंघीताली और अलीनगर तक स्थित सभी माइनरों के गेटों पर सिंचाई विभाग की ओर से ताला लगाकर वेल्डिंग किए जाने से किसानों में भारी नाराजगी है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नहर के संचालन के इतिहास में पहली बार सिंचाई के पानी को रोकने के लिए इस तरह गेटों की तालाबंदी की गई है, जिससे क्षेत्र के किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
इस मामले को लेकर पूर्व सांसद रामकिशुन ने सिंचाई विभाग की कार्रवाई को किसान विरोधी बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जोगवा से अलीनगर तक सभी माइनरों के गेटों को वेल्डिंग कर बंद करना किसानों के हितों के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि नरवन क्षेत्र के किसानों के लिए अदसड़ पम्प कैनाल और चारी पम्प कैनाल को चालू क्यों नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि नहर की सुरक्षा को लेकर कोई समस्या थी तो विभाग पुलिस गश्त या अन्य सुरक्षा व्यवस्था कर सकता था, लेकिन गेटों पर स्थाई रूप से ताला लगाना उचित नहीं है।

वहीं, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने भी इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे पूरी तरह किसान विरोधी कदम बताते हुए इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सिंचाई व्यवस्था बाधित होने से किसानों की फसलें प्रभावित होंगी, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। नहर के माइनरों की तालाबंदी को लेकर क्षेत्र के किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसान शीघ्र ही गेट खोलकर सिंचाई व्यवस्था बहाल किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस बाबत सिंचाई विभाग की एसडीओ तृप्ति सोनी ने बताया कि 23 से 31 जुलाई तक रोस्टर के अनुसार पानी आगे जाना था, लेकिन क्षेत्रीय किसान अपने सुविधानुसार माइनर खोल कर पानी ले जा रहे थे। लिहाजा गेट बंद कर दिया गया है। एक अगस्त से सुबह ही सभी माइनरों में पानी खोल दिया जाएगा।






