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Lucknow News: भगवा त्रिशूल यात्रा सोमवार को पहुंचेगी लखनऊ, जोरदार स्वागत की तैयारी, जानिए क्या बोले यात्रा के संयोजक राजेश यादव

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PRAHAR DUSTAK/लखनऊ। धार्मिक स्थल को संरक्षित करने और युवाओं को सनातन संस्कृति के अभियान से जोड़ने के उद्देश्य के लिए अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधकपरिषद (आईएमपीसी) द्वारा राज्य में निकाली गई ‘भगवा त्रिशूल यात्रा’ सोमवार (3 मार्च) को राज्य की राजधानी लखनऊ पहुंचेगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

रविवार को लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए ‘अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद’ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ की ऐतिहासिक सफलता निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश सरकार की बड़ी सफलता है। ‘अंतर्राष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद’ इस सफलता का जश्न मशहूर भजन गायक कन्हैया मित्तल के साथ मनाने जा रहा है। एक मार्च को प्रयागराज से शुरू हुई ‘भगवा त्रिशूल यात्रा’ तीन मार्च को लखनऊ पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में विदेशों के 12 मंदिरों सहित 120 मंदिरों को एक सूत्र में बांधने का अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए प्रयागराज से दिल्ली तक शुरू हुई भगवा त्रिशूल यात्रा तीन मार्च को लखनऊ पहुंच रही है। इस यात्रा का पूरे दिन शहर में जगह-जगह स्वागत किया जाएगा।


सांस्कृतिक विरासत को जीवित करेंगे युवा:राजेश यादव

भगवा त्रिशूल यात्रा’ के उद्देश्य  पर राजेश यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को भारतीय विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से ‘अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद’ द्वारा राज्य में ‘भगवा त्रिशूल यात्रा’ निकाली जा रही है। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों का संरक्षण करना है, बल्कि युवाओं को सनातन संस्कृति, भारतीय इतिहास और मंदिरों के आधुनिकीकरण के अभियान से जोड़ना भी है।  यह यात्रा एक मार्च को प्रयागराज से शुरू हुई थी। जिसका समापन 29 मार्च को दिल्ली में एक भव्य महासम्मेलन में होगा।
राजेश यादव ने कहा कि भगवा त्रिशूल यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और भारत की आध्यात्मिक विरासत को संजोने का एक प्रेरणादायक अभियान है। यह यात्रा युवाओं को भारतीय संस्कृति, मंदिर प्रबंधन और आध्यात्मिक नेतृत्व के साथ-साथ धार्मिक चेतना से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। मंदिरों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने, ऑनलाइन दर्शन सुविधा, युवाओं को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने और प्राचीन विरासत के संरक्षण की योजना बनाई गई है।

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