PRAHAR DUSTAK/चंदौली जिले के सैयदराजा थाना क्षेत्र के बगही कुंभापुर (मकरमपुर) गांव में मारपीट, लूटपाट और जातिसूचक गालियां देने के मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने सुशील सिंह सहित पांच लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

मिली जानकारी के अनुसार गांव निवासी आशा देवी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि बीते वर्ष 27 नवंबर की शाम करीब छह बजे गांव के विनायक उर्फ सूरज सिंह, सुशील सिंह, सागर सिंह, बलवीर सिंह और रामबली सिंह लाठी-डंडा लेकर उनके दरवाजे पर पहुंचे और भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर पुराने मुकदमे को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने कहा कि पियूष उर्फ छोटू की मृत्यु मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर चोट लगने से हुई थी और इस तथ्य को छिपाकर उन्होंने पहले एफआईआर दर्ज कराई थी। जब पीड़िता और उसके परिवार ने पुलिस प्रशासन को वास्तविक तथ्य बताते हुए प्रार्थना पत्र दिया तो आरोपी पक्ष नाराज हो गया। आरोप है कि इसी बात से आक्रोशित होकर रामबली सिंह ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और अन्य आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाया।
आरोप है कि इसके बाद सभी आरोपी लात-घूंसों और डंडों से मारपीट करने लगे। शोर सुनकर पीड़िता के पति हरचरण और दुइजा देवी बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। पीड़िता का आरोप है कि विनायक उर्फ सूरज सिंह ने कट्टे की मुठिया से उसके पति के सीने पर प्रहार किया, जबकि रामबली सिंह ने लाठी से दुइजा देवी के पेट पर वार किया, जिससे दोनों को गंभीर चोटें आईं। बलवीर सिंह पर पीड़िता के गले से मंगलसूत्र छीनने का भी आरोप है।
पीड़िता के अनुसार जान बचाने के लिए वे लोग घर के भीतर भागे तो आरोपी घर में घुस आए और वहां भी मारपीट करते हुए सामान में तोड़फोड़ की। जाते समय जान से मारने की धमकी दी गई। घटना में सैकड़ों रुपये का नुकसान होने का भी दावा किया गया है।
आशा देवी का आरोप है कि घटना की सूचना तत्काल स्थानीय थाने में दी गई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई में टालमटोल की। बाद में मेडिकल परीक्षण कराने की सलाह दी गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदौली में जांच के बाद गंभीर चोटों को देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। मेडिकल रिपोर्ट लेकर थाने पहुंचने पर भी कार्रवाई नहीं की गई। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक सहित उच्चाधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन सुनवाई न होने पर अंततः न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के आदेश पर अब पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, मारपीट, लूट और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।







