चन्दौली। तीन साल बाद मंगलवार को 14 जनवरी को संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। वर्ष 2022 वर्ष 2023 व 2024 में श्रद्धालुओं ने 15 जनवरी को संक्रांति पर्व मनाया था। वहीं, वर्ष 2021 में संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को पड़ा था।
महावीर पंचांग के अनुसार, भगवान सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को दिन के 2:58 बजे प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ खरमास भी समाप्त हो जाएगा। इसी दिन मकर संक्रांति का पुण्य काल दिनभर रहेगा। पूजा का समय सुबह 7:02 बजे के बाद आरंभ हो जाएगा। स्नान-दान के लिए यह पर्व शुभ फलदायी होगा।
श्री रुद्र बाला जी धाम के पुजारी पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि मकर संक्रांति के पावन पर्व पर शरीर पर गुड़ और तिल लगाकर गंगा आदि पवित्र नदी में स्नान करना लाभदायी होता है. इसके बाद दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। पंडित कान्हा कृष्ण ने बताया कि महिलाओं को मकर संक्रांति के दिन बाल नहीं धुलने चाहिए। गुस्से पर काबू रखें और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करें। इससे आपका मन भी खुश रहेगा और पॉजिटिव एनर्जी आएगी। मान्यता है कि इस दिन चाहे घर के अंदर हो या बाहर पेड़ों की कटाई या छंटाई नहीं करनी चाहिए।
आज से अच्छे दिन की शुरूआत
पंडित कान्हा कृष्ण ने बताया कि 14 जनवरी ऐसा दिन है, जब धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है, ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है। जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है, तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है, तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। इसी के साथ खर मास की समाप्ति हो जाती है।
आज से भगवान सूर्य होंगे उत्तरायण
श्री रुद्र बाला जी धाम के पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि मकर संक्रांति से ही भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। इस बार मंगलवार और पुष्य नक्षत्र के साथ स्थिर योग के शुभ संयोग में मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन चंद्र व मंगल की युति से महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहा है। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:28 बजे तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का प्रवेश हो जाएगा। इस तरह दोनों नक्षत्रों का संयोग बन रहा है।
सूर्य वैदिक मंत्र
ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।
इसके साथ ही शाम के समय यानी सूरज ढलने के बाद इस दिन भोजन ना करें।
राशि के अनुसार करें दान
● मेष- लाल वस्त्रत्त्, तांबे के बर्तन, मसूर की दाल।
● वृषभ- चावल, खिचड़ी, चांदी की वस्तु, घी।
● मिथुन- हरे व पीले वस्त्रत्त्, हरी सब्जी, मूंग।
● कर्क- सफेद वस्त्रत्त्, तंदुल व सफेद ऊन।
● सिंह- गेहूं, गुड़, ताम्र पात्र व लाल कपड़े।
● कन्या- गो अर्क, फल, खड़ाऊ, हरी घास।
● तुला- सप्तधान, इत्र।
● वृश्चिक- गेहूं, गुड़, लाल वस्त्रत्त्।
● धनु- शक्कर, हल्दी, स्वर्ण व पीले वस्त्रत्त्।
● मकर- काला कंबल, काले तिल।
● कुंभ- गाय का घी, काले वस्त्रत्त्।
● मीन- चने की दाल, धर्म ग्रंथ व पीले वस्त्रत्त् दान करें।



















