PRAHAR DUSTAK सुनील कुमार/चंदौली । उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील के अमदहां चरनपुर गांव में मंगलवार की सुबह दिल दहला देने वाली घटना हुई। जयमोहनी रेंज के वन कर्मी भारी लाव-लश्कर और जेसीबी मशीन के साथ गांव में पहुंचे और अनुसूचित जाति के प्रताप कोल के घर के पास बने वर्षों पुराने कुएं को बिना किसी पूर्व सूचना के पाटना शुरू कर दिया।
विरोध किया तो हुई मारपीट और बदसलूकी
जब प्रताप कोल ने इस अवैध कार्रवाई का विरोध किया तो वन विभाग के कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कर्मचारियों ने न केवल प्रताप को बेरहमी से पीटा बल्कि उनकी पत्नी के साथ भी अभद्रता की। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि महिलाओं के कपड़े तक खींचे गए और पूरे परिवार को धमकाया गया।
झोपड़ी में लगाई आग, राख हुआ सबकुछ
वन विभाग की दबंगई यहीं नहीं रुकी। जाते-जाते वनकर्मियों ने प्रताप कोल की झोपड़ी में आग लगा दी। आग इतनी भीषण थी कि परिवार का सारा सामान जलकर खाक हो गया। पीड़ित ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पर तब तक सब कुछ नष्ट हो चुका था।
पीड़ित परिवार सदमे में, प्रशासन से उम्मीद
प्रताप कोल और उनका परिवार इस घटना से बेहद डरा और सदमे में है। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी अपराध के इस तरह क्यों प्रताड़ित किया गया? उनका सवाल है कि क्या गरीब होना, दलित होना ही उनका अपराध है?
वन विभाग मौन, प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
इस मामले में जब जयमोहनी रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी मकसूद आलम से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं, उप जिलाधिकारी नौगढ़ आलोक कुमार ने कहा, “हम मामले की जांच कराएंगे और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”
सवाल खड़ा करता यह मामला
इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और दलितों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक और कितना न्याय दिला पाता है। पीड़ित परिवार आज भी आस लगाए बैठा है।



















