PRAHAR DUSTAK/चन्दौली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने बुधवार को बबुरी थाना क्षेत्र के पांडेयपुर कस्बा में बिजली के निजीकरण के खिलाफ किसान मजदूर महापंचायत का आयोजन किया। महापंचायत में बिजली कानून संशोधन 2022 को वापस लेने के साथ ही वाराणसी और आगरा विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
महापंचायत को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के राज्य सचिव कामरेड डा. हीरालाल यादव ने कहा कि यह मोदी और योगी की डबल इंजन की सरकार बिजली का निजीकरण करके गरीबों के घर से उनका चिराग भी बुझा रही है। महंगाई और बेरोजगारी की वजह से कराह रही जनता बिजली के और अधिभार को झेल नहीं पाएगी।

वहीं राज्य कमेटी सदस्य गुलाब चन्द ने कहा कि 1948 में ही बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की प्रस्तावना में ही “बिजली एक सामाजिक जरूरत की चीज है उसे बिना लाभ हानि के सरकार की जिम्मेदारी है, जो जनता को मुहैया कराने की है।” कहा कि संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बिजली के निजीकरण से आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों पर गाज गिरने वाली है।

जबकि सीपीएम के जिला सचिव कामरेड शंभूनाथ यादव ने कहा कि सरकार अपने वादे के मुताबिक 200 यूनिट बिजली फ्री करने से मुकर रही है। बिजली का निजीकरण करके किसानों की खेती की लागत को बढ़ाया जा रहा है। निजी क्षेत्र में बिजली जाने से पूंजीपति मालामाल होंगे और जनता तबाह होगी। महापंचायत को सतीश चन्द, लालचंद यादव, बुद्धिराम, शकुन्तला देवी, शांति देवी, मिठाईलाल, चरणदास, कन्हैया, सहेंदर चौहान, मन्नू शर्मा, तिलकधारी, कालीचरण, नाथूराम, नरेंद्र, राकेश कुमार आदि ने संबोधित किया। गुड्डू रंगीला ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किया। महापंचायत की अध्यक्षता जोखू संचालन लालचंद व जालंधर ने किया।



















