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दुधारू पशु का पोषण प्रबंधन बहुत ही आवश्यक-डॉ वाईके यादव

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चन्दौली। दुधारू पशु का पोषण प्रबंधन बहुत ही आवश्यक है। पशु के शरीर में जमी चर्बी उसकी वास्तविक स्थिति की ओर इशारा करती है। साथ ही शरीर में जमी इस चर्बी को शरीर अवस्था मूल्यांकन के माध्यम से मापा भी जा सकता है। उक्त बातें नियामताबाद के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ वाईके यादव ने एक वार्ता के दौरान कहीं।

शरीर अवस्था मूल्यांकन डेयरी किसानों के लिए बहुत जरूरी

उन्होंने कहा कि शरीर अवस्था मूल्यांकन डेयरी किसानों के लिए बहुत ही जरूरी है। जिससे वे गाय के शरीर की अवस्था का मूल्यांकन कर सकते हैं। साथ ही उसके अनुसार अधिक दूध उत्पादन के लिए उचित प्रबंधन कर सकते हैं। कहा कि पशुपालक को इसके लिए बहुत ही जटिल प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती है। उसे सिर्फ सावधानीपूर्वक अवलोकन करके आसानी से सीखा जा सकता है। दुधारू पशु को देखकर और उसे छू करके भी उसकी स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।

पशु के शारीरिक वजन में यदि अधिक घटोत्तरी हो तो उसे कैलोरी युक्त अनाज आहार दें

सही मूल्यांकन के लिए पशु को छूना आवश्यक है। कहा कि पशु के शरीर में चर्बी की परत उस की विभिन्न अवस्था के साथ परिवर्तित होती रहती है। विमुखी अवस्था में दुधारू पशु ज्यादा खाती है। ऐसे में उसे आहार में ऊर्जा की मात्रा कम देना चाहिए। दुग्ध देने की अवस्था में यदि पशु की उत्पादन क्षमता कम हो तो उसे प्रोटीन की मात्रा 17 प्रतिशत तक आहार में बढ़ाना चाहिए। पशु के शारीरिक वजन में यदि अधिक घटोत्तरी हो तो उसे कैलोरी युक्त अनाज आहार में बढ़ाना चाहिए। साथ ही रेशेदार चारा को भी 20 प्रतिशत बढ़ा देना चाहिए।

इससे उसके शरीर का वजन सामान्य बना रहेगा। प्रसव के बाद अधिक दूध उत्पादन के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। वहीं इससमय पशु ज्यादा खाने में असमर्थ भी होती है। इसलिए इससे पूर्व ही पशु को अधिक चारा देना चाहिए। ताकि उसके शरीर में जमी चर्बी ऊर्जा की मांग को पूरा कर सके। यदि पशुपालक इन बातों का ध्यान रखेंगे तो उन्हें दुधारू पशुओं से अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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